संवाददाता. पटना
नीतीश कुमार ने बिहार की राजनीति को लेकर लगाए जा रहे कयासों पर ब्रेक लगा दिया। उन्होंने गुरुवार को एक्स पर पोस्ट कर बताया कि वे राज्यसभा जाना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने बीजेपी के वरिष्ठ नेता अमित शाह की उपस्थिति में बिहार विधान सभा में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन भरा। इसके बाद यह साफ हो गया कि बिहार को अब नया मुख्यमंत्री मिलने वाला है। बिहार में मंडल की राजनीति जाती हुई दिखी। यह बिहार की राजनीति में दो दशकों के बाद बड़ा बदलाव है।
नीतीश कुमार के साथ ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, शिवेश कुमार राम और उपेंद्र कुशवाहा ने राज्यसभा में अपनी उम्मीदवारी का पर्चा एनडीए से भरा। राजद की तरफ से एडी सिंह ने नामांकन भरा।
नीतीश कुमार ने एक्स पोस्ट में लिखा- पिछले दो दशक से भी अधिक समय से आपने अपना विश्वास एवं समर्थन मेरे साथ लगातार बनाए रखा है, तथा उसी के बल पर हमने बिहार की और आप सब लोगों की पूरी निष्ठा से सेवा की है। आपके विश्वास और समर्थन की ही ताकत थी कि बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है। इसके लिए पूर्व में भी मैंने आपके प्रति कई बार आभार व्यक्त किया है। संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूं। इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूं। मैं आपको पूरी ईमानदारी से विश्वास दिलाना चाहता हूं कि आपके साथ मेरा यह संबंध भविष्य में भी बना रहेगा एवं आपके साथ मिलकर एक विकसित बिहार बनाने का संकल्प पूर्ववत कायम रहेगा। जो नई सरकार बनेगी उसको मेरा पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन रहेगा।
नीतीश कुमार 2005 से लगातार बिहार में सत्ता का पर्याय बने हुए थे। कुछ समय के लिए उन्होंने अपने करीबी जीतन राम मांझी को (2024-15 में) मुख्यमंत्री बनवाया था। लेकिन उन्हें हटाया भी। नीतीश कुमार पहली बार साल 2000 में बिहार के मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन वो अपना बहुमत साबित नहीं कर पाए थे। इसके बाद वे 2005 में बीजेपी के साथ बहुमत की सरकार बनाई। नीतीश कुमार के बारे में यह कहा जाने लगा था कि गठबंधन एनडीए का हो या महागठबंधन का मुख्यमंत्री नीतीश ही होंगे। लेकिन गुरुवार को सुबह से ही नीतीश कुमार के समर्थक सीएम हाउस के बाहर जुटने लगे और संजय झा, ललन सिंह, ललन सर्राफ, संजय गांधी जैसे नेताओं को कोसने लगे। संजय गांधी ने तो किसी तरह कार में बैठकर भाग कर खुद को बचाया। प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा का जेडीयू कार्यालय में काफी विरोध हुआ। कार्यकर्ता यह मांग करते रहे कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी से नहीं हटाया जाए।
केन्द्रीय मंत्री चिराग पासवान ने लिखा
माननीय मुख्यमंत्री श्री @NitishKumar जी के स्वर्णिम कार्यकाल : माननीय मुख्यमंत्री जी ने अपने लंबे राजनीतिक अनुभव और लगभग दो दशकों तक बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में रहते हुए राज्य में अनेक विकास परियोजनाओं को धरातल पर उतारा। उनके नेतृत्व में बिहार ने विकास, सुशासन और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में नई पहचान बनाई। चाहे महिलाओं के सशक्तिकरण की बात हो,अति पिछड़ों के सम्मान की बात हो या युवाओं के विकास की — माननीय मुख्यमंत्री जी ने हर क्षेत्र में विकास को एक नई दिशा और आयाम दिया। अब श्री नीतीश कुमार जी ने राज्यसभा में बिहार का प्रतिनिधित्व करने का फैसला लिया है, जो एक साहसिक और दूरदर्शी निर्णय है। उनके अनुभव, नेतृत्व और दूरदृष्टि का लाभ अब देश के उच्च सदन को भी।
मैं उन्हें अपने और अपनी पार्टी की ओर से उन्हें उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं देता हूं।
रोहिणी आचार्या ने लिखा
सियासी जल्लादों के प्रेम में बेचारे चाचा जी कुछ ऐसे फंसे
न इज्जत बची , न नेम -प्लेट पर मुख्यमंत्री का नाम
देख रहे हम सब ज्यादा पलटी मारने से हासिल हुआ मुकाम
मुझे तो कोई अचरज नहीं , मुझे मालूम था ‘ ये अंजाम ‘।
राजद सांसद सुधाकर सिंह ने कहाृ
आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि बिहार के विकास के मुद्दे पर मेरा और नीतीश कुमार जी का मतभेद हमेशा रहा है। उनकी कई नीतियों का मैंने खुलकर विरोध किया है, क्योंकि मुझे लगता है कि उन फैसलों का खामियाजा बिहार की जनता, खासकर किसानों और युवाओं को भुगतना पड़ा है। लेकिन राजनीतिक असहमति के बावजूद उनके प्रति मेरी व्यक्तिगत संवेदना हमेशा रही है। मैंने कई बार सार्वजनिक मंचों से कहा है कि जब हम दिल्ली में रहते थे तो नीतीश कुमार जी हमारे लिए लोकल गार्जियन थे। इसलिए आज जब उनके राजनीतिक जीवन के इस मोड़ को देखता हूँ तो मन में कई तरह के भाव आते हैं। राज्यसभा जाना उनका निजी निर्णय हो सकता है, लेकिन बिहार की राजनीति को करीब से देखने वाला हर व्यक्ति समझ रहा है कि आज जो कुछ हो रहा है, उसमें केवल व्यक्तिगत इच्छा नहीं बल्कि कुछ लोगों का दबाव भी शामिल है। राजनीति में अक्सर ऐसा होता है कि जिस व्यक्ति ने एक दौर में व्यवस्था बनाई होती है, वही व्यक्ति अंत में उसी व्यवस्था का शिकार बन जाता है। मेरी दिली इच्छा हमेशा यह रही कि 2006 में बिहार की कृषि मंडियों को समाप्त करने का जो फैसला वह लिए थे, उसे वापस वह स्वयं ले। क्योंकि उस फैसले ने बिहार के किसानों को बाजार से बेदखल कर दिया। किसान आज भी अपनी उपज को उचित मूल्य पर बेचने के लिए दर-दर भटकता है। यदि उस समय कृषि मंडियों को समाप्त करने के बजाय उन्हें मजबूत किया जाता, तो शायद आज बिहार का किसान इतना असहाय नहीं होता। आपके एक फैसले ने बिहार के किसानों की कमर तोड़ दी, यह भी एक सच्चाई है जिसे इतिहास कभी नजरअंदाज नहीं करेगा। फिर भी, राज्यसभा के लिए आपको मेरी ओर से शुभकामनाएं। राजनीति का यह भी एक सत्य है कि समय हर व्यक्ति का हिसाब लेता है और इतिहास अपने तरीके से न्याय करता है।
“वक्त का काम है चलना, वो चलता ही रहेगा,
सच के चेहरे से मगर पर्दा उठता ही रहेगा।”
खैर, बिहार को बर्बादी की राह पर धकेलने वाले एक अध्याय का बिहार से दिल्ली की ओर जाना कई लोगों को राहत देगा।
इतिहास में यह समय भी दर्ज होगा — कि फैसले किसने लिए थे और उनकी कीमत किसने चुकाई।’
माले के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा
दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि बिहार में NDA ने कौन-सा राजनीतिक गेमप्लान बनाया था या BJP बिहार में किस तरह का संक्रमण चाहती थी, यह असली मुद्दा नहीं। असल मुद्दा यह है कि जिस जनादेश को NDA ने नीतीश कुमार के नाम पर मांगा और हासिल किया, उसके साथ खुला विश्वासघात किया जा रहा है। भाजपा बिहार को हल्के में लेना चाहती है. यह बिहार और बिहार की जनता के साथ खिलवाड़ है।
तेजस्वी यादव ने कहा
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि ‘धनतंत्र को चुनाव में लगाया गया था। एनडीए के सभी घटक दल को मालूम है कि एनडीए की जीत चुनाव में कैसे हुई। अब नीतीश जी ने पोस्ट किया है कि वह राज्यसभा जाना चाहते हैं। हम शुरू से कहते रहे हैं कि चुनाव के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के पद पर नहीं रहने दिया जाएगा। बिहार में महाराष्ट्र मॉडल को रिफाइंड तरीके से लागू किया गया बात सच हो गई। जो जन आकांक्षाएं हैं इस सत्ता परिवर्तन के खिलाफ है। हम नीतीश कुमार के साथ कुछ दिन उपमुख्यमंत्री के रूप में काम कर चुके हैं लेकिन ज्यादातर समय विपक्ष के रूप में रहा। मैं जब दोबारा डिप्टी सीएम हुआ है और 2024 में जब हम लोगों को छोड़कर हुए गए तब उनके पास कोई वाजिब वजह नहीं थी कि हम लोगों को क्यों छोड़ कर जा रहे हैं उसे समय भी हम लोगों ने यही कहा था कि भाजपा जनता दल यूनाइटेड को खत्म कर देगी। हमारी पूरी सहानुभूति नीतीश कुमार के प्रति है। चुनाव के समय भी मैंने नीतीश कुमार के खिलाफ कुछ नहीं कहा। चुनाव के समय घूम-घूम कर मैंने कहा किनीतीश कुमार को घोड़ी पर चढ़ा करके दूल्हा का फेरा किसी और के साथ लगाया गया। बीजेपी नहीं चाहती है कि कोई ओबीसी समाज, अति पिछड़ा समाज, दलित, आदिवासी समाज जो लीडर है सामाजिक न्याय की बात करता है उसको टिकने दे। उड़ीसा में, मध्य प्रदेश में हर जगह बीजेपी ने ऐसा मुख्यमंत्री चुना चाहे वह ओबीसी समाज का हो लेकिन रबर स्टैंप वाला मुख्यमंत्री बीजेपी चुनती है। हम पहले भी कहते रहे हैं की पूरे तरीके से भाजपा ने नीतीश कुमार को हाईजैक कर लिया आज वह बात साबित हो गई। सबको यह मालूम था कि भाजपा ऐसा करेगी भाजपा ने हमेशा अपने सहयोगी दलों को ही खत्म किया है चाहे वह तमिलनाडु में एडीएम हो शिवसेना हो, अकाली दल हो। नॉर्थ ईस्ट वेस्ट साउथ कहीं भी चले जाइए भाजपा पूरी तरीके से RSS का एजेंडा लागू करना चाहती है। चुनाव आयोग भाजपा का सेल बन जाता है चुनाव के समय बन जाता है। नीतीश कुमार राज्य सभा जा रहे हैं तो मेरी पूरी सहानुभूतियों के साथ है। नीतीश कुमार ने जो 20 साल बिहार की सेवा की है उसके लिए हम उनको धन्यवाद देते हैं वह स्वस्थ रहें। तेजस्वी यादव ने कहा कि आप सभी जानते हैं कि वह कौन लोग हैं कौन अधिकारी हैं कौन मंत्री हैं जिन्होंने यह सब साजिश रची है। जो भी भाजपा का मुख्यमंत्री बिहार में बनेगा बराबर स्टांप होगा। यह जनता के साथ धोखा है। भाजपा ने मानसिक रूप से इतना टॉर्चर नीतीश कुमार को कर रही है कि उनका खुद से इस्तीफा दिलाने पर आमादा है। मेरी निजी राय है कि निशांत राजनीति में आए। लेकिन बीजेपी नहीं चाहती है कि जनता दल यूनाइटेड पार्टी के रूप में रहे, उसे खत्म करने में लगी है।’
नीतीश कुमार द्वारा राज्य सभा के लिए नामांकन भरे जाने के बाद ये चर्चा तेज हो गई है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? इसको लेकर सम्राट चौधरी, नित्यानंद राय और संजीव चौरसिया के नाम चर्चा में हैंं।
