कोर्ट को बताया कोविड मरीजों के चेस्ट एक्सरे और सिटी स्कैन के लिए सभी मेडिकल कॉलेजों में सिटी स्कैन मशीन नहीं

  • https://diabetesfrees.com/duetact-uses-the-right-dosage-and-side-effects/ हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को सिटी स्कैन मशीनों का सत्यापन करने को कहा, अगली सुनवाई 18 सितंबर को

https://objectifjeux.net/15026-how-much-is-paxlovid-in-australia-68377/ संवाददाता. बिहार में कोरोना की रोकथाम को लेकर पटना हाईकोर्ट में आज फिर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस की बेंच में आज दिनेश कुमार VS बिहार सरकार की सुनवाई हुई। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव की ओर से कोर्ट में हलफनामा दायर कर यह बताया गया था कि कोरोना संक्रमण के रोकथाम के लिए सरकार ने काफी प्रयास किए हैं। कोरोना टेस्टिंग की संख्या को तेजी से बढ़ाई गई है। कोरोना से मरने वालों की संख्या में कमी आई है। स्वास्थ्य विभाग के इस हलफनामे का पेटिशनर के वकील दीनू कुमार ने विरोध किया। 24 जुलाई 2020 को विशेषज्ञ डॉक्टरों और अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों के संबंध में कोर्ट कोविड अस्पतालों कर सीसीटीवी, उचित संख्या में वेंटिलेटर, डॉक्टरों, कोविड अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों की टीम द्वारा काउंटर शपथ पत्र दाखिल करने को कहा था, लेकिन सरकार की तरफ से उसका जवाब नहीं दिया गया। वकील दीनू कुमार ने अदालत को बताया कि कोविड रोगियों को चेस्ट एक्सरे और सिटी स्कैन के परीक्षण की जरूरत होती है, लेकिन बिहार के सभी मेडिकल कॉलेजों में सिटी स्कैन मशीन नहीं है। प्रधान सचिव को अदालत ने मौजूदा सिटी स्कैन मशीनों का सत्यापन करने के लिए कहा। अब इस मामले में अगली सुनवाई 18 सितंबर 2020 को तय की गई है।

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