बिहार के पर्यटन प्रक्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विश्व पर्यटन दिवस 2026 के अवसर पर बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम, पटना के द्वारा सिख हेरिटेज गुरूनानक भवन, सर्पेटाइन रोड, दारोगा प्रसाद राय पथ, पटना में सेमिनार का आयोजन किया गया।
विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने राज्य को देश और दुनिया के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष विश्व पर्यटन दिवस की अंतरराष्ट्रीय थीम “डिजिटल एजेंडा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता: पर्यटन को नया रूप देने के लिए” है, जो बिहार पर्यटन नीति, 2023 के उद्देश्यों के अनुरूप है।

बिहार में पर्यटन क्षेत्र तेजी से उभर रहा है। वर्ष 2025 में राज्य में 6.62 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया। पर्यटकों की बढ़ती संख्या राज्य की समृद्ध ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के प्रति बढ़ते आकर्षण को दर्शाती है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य सरकार ने पर्यटन विकास से संबंधित विविध परियोजनाओं को मंजूरी दी है। सभी पर्यटन परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य में कई महत्वाकांक्षी पर्यटन परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। इनमें—

– सीतामढ़ी के पुनौराधाम में माता सीता की जन्मस्थली पर भव्य मंदिर का निर्माण।
– सोनपुर में बाबा हरिहरनाथ मंदिर कॉरिडोर का विकास।
– बोधगया में 165 करोड़ रुपये की लागत से बौद्ध ध्यान एवं अनुभव केंद्र का निर्माण।
– सहरसा की मत्स्यगंधा झील में ग्लास ब्रिज और अन्य पर्यटन सुविधाओं का विकास।
– पटना, वैशाली और राजगीर में फाइव-स्टार होटल तथा इको-टूरिज्म सुविधाओं का विकास।
– पटना हाट सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना।
– वाल्मीकिनगर में लव-कुश पार्क का विकास। आदि का निर्माण शामिल है।

‘स्वदेश दर्शन 2.0’ के तहत सोनपुर का उन्नयन, अंबिका भवानी मंदिर में पर्यटक सुविधाओं का विकास तथा गया में बौद्ध ध्यान केंद्र की स्थापना पर भी कार्य किया जा रहा है। बिहार की धार्मिक, सांस्कृतिक और विरासत संपदा को पर्यटन विकास से जोड़ा जा रहा है। रामायण सर्किट के अंतर्गत पुनौराधाम, कुशेश्वरस्थान और सिंहेश्वर; बौद्ध सर्किट में बोधगया, राजगीर, नालंदा और वैशाली; तथा सूफी सर्किट में फुलवारी और मनेर को शामिल कर पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। लक्जरी आतिथ्य सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से राजगीर में दो, वैशाली में एक और पटना में दो पांच सितारा होटलों की योजनाओं पर कार्य चल रहा है।

वर्ष 2026-27 के लिए मत्स्यगंधा झील और वाल्मीकि पार्क को पूर्ण करने, गया में 1,000-बेड क्षमता वाले धर्मशाला परिसर के निर्माण तथा बिहार को घरेलू पर्यटक आगमन के मामले में देश के शीर्ष 10 राज्यों में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य को विदेशी पर्यटक आगमन के मामले में देश के शीर्ष पांच राज्यों में लाने तथा सकल घरेलू उत्पाद में पर्यटन के योगदान को राष्ट्रीय स्तर के 6.8 प्रतिशत तक बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।

इन परियोजनाओं से राज्य में पर्यटन अवसंरचना को मजबूती मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर सृजित होंगे।
कार्यक्रम में बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक श्री नन्द किशोर ने डिजिटल तकनीक और सतत पर्यटन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिहार पर्यटन नीति, 2023 के तहत राज्य में निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। पर्यटकों की सुविधा के लिए एकीकृत वेबसाइट और मोबाइल ऐप, ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली, जीपीएस आधारित सेवाएं तथा रियल-टाइम पर्यटन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

महाप्रबंधक चंदन चौहान तथा श्री शंभू नाथ ने कहा कि राज्य सरकार ने सतत और जिम्मेदार पर्यटन को अपनी प्राथमिकता बनाया है। पर्यावरण अनुकूल पहलों, ई-वाहनों तथा रोपवे जैसे गैर-मोटराइज्ड परिवहन साधनों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
पदाधिकारियों ने बताया कि पर्यटन क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने आकर्षक पैकेज तैयार किए हैं। इनमें 10 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं के लिए 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी, 50 करोड़ रुपये और उससे अधिक की परियोजनाओं के लिए 25 प्रतिशत सब्सिडी तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अति पिछड़ा वर्ग, पिछड़ा वर्ग, दिव्यांग और महिला उद्यमियों के लिए विशेष पैकेज शामिल हैं। भूमि रूपांतरण शुल्क और स्टाम्प ड्यूटी की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति का प्रावधान भी किया गया है।
पर्यटन क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करने के लिए नीति अवधि के दौरान एक लाख लोगों को कौशल विकास एवं प्रशिक्षण प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही एक लाख से अधिक रोजगार सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बोधगया और वैशाली स्थित होटल प्रबंधन संस्थान उन्नत प्रशिक्षण संस्थानों के रूप में कार्य कर रहे हैं।
विश्व पर्यटन दिवस 2026 का संदेश स्पष्ट है कि डिजिटल नवाचार और सतत विकास के माध्यम से बिहार अपनी समृद्ध विरासत का संरक्षण करते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए नए और बेहतर पर्यटन अनुभव तैयार कर रहा है। राज्य सरकार बिहार को एक सुरक्षित, समावेशी, पर्यावरण-अनुकूल और विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।