प्रधान सचिव सी.के. अनिल का निर्देश, स्टे ऑर्डर वाले मामले ही माने जाएंगे लंबित
संवाददाता. पटना
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार ने बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम, 2009 एवं नियमावली, 2010 के अंतर्गत ‘लंबित’ मामलों की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, समाहर्ताओं एवं उप समाहर्ताओं (भूमि सुधार) को वादों के त्वरित निष्पादन का निर्देश दिया है।
प्रधान सचिव सी.के. अनिल द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि सभी वादों का निष्पादन तीन माह के भीतर करना अनिवार्य है। ‘लंबित’ का अर्थ केवल वही मामले होंगे, जिनमें सक्षम न्यायालय द्वारा सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत अस्थायी निषेधाज्ञा (Stay Order/Temporary Injunction) जारी हो।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि सक्षम प्राधिकार एवं अपीलीय प्राधिकार को मामलों का निष्पादन संक्षिप्त प्रक्रिया (Summary Disposal) के तहत करना है। समाहर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे साप्ताहिक समीक्षा बैठक कर अधिकतम तीन माह के भीतर वादों के निष्पादन को सुनिश्चित करें।
