बांधों के रख-रखाव में लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और बाढ़ से हुए नुकसान का मुआवजा देने की मांग
पटना.

। गंडक नदी में सारण जिले के दो स्थानों पर बांध टूटने के कारण जिले के चार प्रखंडों के बड़ी संख्या में गांव बाढ़ के पानी में डूब गए हैं। स्थिति का जायजा लेने के लिए भाकपा माले सारण जिला सचिव कॉमरेड हंसनाथ राम के नेतृत्व में 1 अक्टूबर 2026 को पार्टी की जिला कमिटी के सदस्य एवं छात्र नेता कॉमरेड कुणाल कौशिक, विकास पासवान, नीरज पासवान, हिमांशु और बिजेंद्र मिश्र ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया।

दौरे के दौरान पार्टी नेताओं ने पाया कि छपरा-मुजफ्फरपुर हाइवे पर कई जगह कमर से लेकर छाती तक पानी बह रहा है। इसके कारण हाइवे पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। गंडक नदी के बांध और फूलवरिया नहर के बीच करीब पांच किलोमीटर के क्षेत्र में आने वाले तमाम गांव बाढ़ के पानी में डूब गए हैं।

बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोग अपने घरों में फंस गए हैं। लोग बांध और नहर के किनारे ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। फंसे हुए लोगों को ट्रैक्टर और नाव के जरिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। लोगों ने जितना संभव हो सका, अपना सामान निकाल लिया है, लेकिन बड़ी मात्रा में संपत्ति बर्बाद होने की स्थिति है।

मकेर सबसे अधिक प्रभावित, अमनौर, परसा और दरियापुर भी बुरी तरह प्रभावित

भाकपा माले नेताओं ने बताया कि हैजलपुर और महेश छपरा के बीच बांध टूटने से सबसे अधिक मकेर प्रखंड प्रभावित हुआ है। इसके अलावा अमनौर, परसा और दरियापुर प्रखंड के गांव भी बाढ़ से गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। वहीं भगवानपुर गांव के सामने बांध टूटने से पानापुर प्रखंड के कई इलाकों में पानी फैल गया है।

भगवानपुर में नया पुल बना हुआ था। पुल के बगल से पानी के रिसाव के कारण तेज धार बन गई है। सलेमपुर गांव में भी बांध टूटने की स्थिति पैदा हो गई थी, जिसे ग्रामीणों ने रात में एकजुट होकर तत्काल बांधकर रोकने का प्रयास किया।

भाकपा माले नेताओं ने कहा कि चारों प्रखंडों में कितने गांव और कितने घर बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, इसका तत्काल आकलन करना भी मुश्किल है। इतनी बड़ी संख्या में गांवों के जलमग्न होने से जान-माल और संपत्ति के भारी नुकसान की आशंका है।

भाकपा माले ने अपने जारी बयान में कहा कि हर साल गंडक नदी के कारण बाढ़ का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद बांधों और नहरों की समुचित निगरानी एवं रख-रखाव नहीं किया जाना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का विषय है। यदि समय रहते बांधों की मजबूती और सुरक्षा पर ध्यान दिया जाता, तो बांध टूटने की स्थिति को टाला जा सकता था। इस पूरे मामले का जवाब सरकार और प्रशासन को देना चाहिए तथा लापरवाही के लिए जिम्मेदार पदाधिकारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

भाकपा माले की प्रमुख मांगें

1. बाढ़ में फंसे सभी लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए और राहत-बचाव अभियान तेज किया जाए।

2. ऊंचे स्थानों, बांधों और अन्य जगहों पर शरण लिए लोगों को तत्काल *भोजन, पेयजल, दवा, रोशनी, बिछावन, तिरपाल सहित सभी आवश्यक राहत सामग्री* उपलब्ध कराई जाए।

3. गंडक नदी के बांध पर शरण लिए लोगों की विशेष निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, क्योंकि वे चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं।

4. बांधों और नहरों की तत्काल तकनीकी जांच कराकर उनकी मजबूती सुनिश्चित की जाए। जहां भी पानी का रिसाव दिखाई दे, वहां तत्काल मरम्मत एवं बचाव कार्य कराया जाए।

5. बाढ़ से हुई *जान-माल और संपत्ति की क्षति का तत्काल सर्वेक्षण* कराया जाए तथा सभी प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए।

6. बाढ़ प्रभावित इलाकों में नाव, ट्रैक्टर, राहत सामग्री और अन्य आवश्यक संसाधनों की संख्या तत्काल बढ़ाई जाए।

7. बांध टूटने और रख-रखाव में हुई लापरवाही की जांच कराई जाए तथा दोषी पदाधिकारियों और जिम्मेदार एजेंसियों पर कार्रवाई की जाए।

भाकपा माले ने सरकार से मांग की है कि बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए राहत और बचाव कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और प्रभावित लोगों को तत्काल हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए।