– सुपौल सदर के अंचल अधिकारी पर फर्जी परिमार्जन, अवैध दाखिल-खारिज, सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग समेत कई गंभीर आरोपों में आरोप पत्र गठित
संवाददाता. पटना
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में विभागीय मामलों की समीक्षा के क्रम में शुक्रवार को राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने दो और अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई को स्वीकृति प्रदान की। इसके साथ ही पिछले एक माह के दौरान विभाग में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, प्रशासनिक अनियमितता और लापरवाही के मामलों में कार्रवाई झेलने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 62 हो गई है।
मंत्री ने कहा कि सरकार की स्पष्ट नीति है कि जनता से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और लापरवाही के लिए किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध सेवा सुनिश्चित करने के लिए विभाग में कार्रवाई का अभियान आगे भी इसी सख्ती के साथ जारी रहेगा।
शुक्रवार को स्वीकृत कार्रवाई के तहत सुपौल सदर के अंचल अधिकारी आनन्द कुमार मंडल के विरुद्ध विभागीय आरोप पत्र गठित किया गया है। उनके विरुद्ध परिमार्जन के बदले जमीन खरीदने, अवैध दाखिल-खारिज एवं फर्जी परिमार्जन करने, निजी वाहन में सरकारी डीजल का उपयोग करने, निजी दलाल रखने सहित कई गंभीर आरोप पाए गए हैं। इन आरोपों के आधार पर विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करने के लिए आरोप पत्र गठित किया गया है।
इसी प्रकार फारबिसगंज (अररिया) की तत्कालीन अंचल अधिकारी एवं वर्तमान में जिला अंकेक्षण पदाधिकारी (सहकारिता सेवा संवर्ग) राखी कुमारी के विरुद्ध भी विभाग स्तर पर आरोप पत्र गठित कर उनके पैतृक विभाग, सहकारिता विभाग, को अनुशासनिक कार्रवाई करने की अनुशंसा की गई है। उन पर अंचल अधिकारी, फारबिसगंज के रूप में पदस्थापन अवधि के दौरान बंदोबस्त रद्दीकरण वाद संख्या 13/2017-18 की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब करने का आरोप है।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 19 जून को मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, दाखिल-खारिज एवं परिमार्जन में अनियमितता, सरकारी भूमि मामलों में गड़बड़ी तथा प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों में 10 अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक एवं विभागीय कार्रवाई को स्वीकृति दी थी। उससे पहले 12 जून को भी 8 अंचल अधिकारियों एवं राजस्व कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई थी।
मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के विरुद्ध कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा इस उद्देश्य में बाधा बनने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
