संवाददाता. पटना
विभिन्न मीडिया माध्यमों में यह खबर प्रसारित की जा रही है कि राज्यपाल सचिवालय, बिहार द्वारा प्रो. बिनोद कुमार त्रिपाठी को सलाहकार (संकाय उत्कृष्टता एवं शैक्षणिक विकास) के पद पर नियुक्ति नियमों के अनुरूप नहीं है। यह खबर पूरी तरह असत्य, तथ्यहीन और भ्रामक है- ये बातें लोकभवन की ओर से कही गई हैं।
कहा गया है कि प्रो. त्रिपाठी की नियुक्ति बिहार वित्त (संशोधन) नियमावली, 2024 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत की गई है। इस नियमावली के नियम 131-जेड में परामर्शी सेवाओं के अंतर्गत विशेषज्ञ, बौद्धिक, प्रशिक्षण और सलाहकारी सेवाओं को शामिल किया गया है। संकाय उत्कृष्टता और शैक्षणिक विकास के क्षेत्र में प्रो॰ त्रिपाठी को दी गई जिम्मेदारी इसी प्रकार की विशेषज्ञ एवं सलाहकारी सेवा है। इसलिए उनकी नियुक्ति उक्त प्रावधान के दायरे में आती है।
यह भी स्पष्ट करना आवश्यक है कि प्रो. त्रिपाठी की नियुक्ति संविदा के आधार पर नहीं, बल्कि नामांकन के आधार पर सलाहकार के रूप में की गई है। इसलिए संविदा पर नियुक्त सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू अंतिम वेतन में से पेंशन की राशि घटाकर भुगतान करने का प्रावधान उनके मामले में लागू नहीं होता। प्रो॰ त्रिपाठी का मानदेय 2 लाख रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया गया है।
यह नियुक्ति निर्धारित नियमों के अनुरूप और बिहार वित्त (संशोधन) नियमावली, 2024 के परिशिष्ट-16 के अनुसार है।
इस प्रकार प्रो. त्रिपाठी की नियुक्ति की प्रकृति, उनकी सलाहकारी भूमिका, निर्धारित मानदेय और उससे संबंधित वित्तीय प्रक्रिया बिहार वित्त (संशोधन) नियमावली, 2024 के प्रावधानों के अनुरूप है। प्रो. त्रिपाठी सेवानिवृत्त सरकारी सेवक की श्रेणी में नहीं आते हैं क्योंकि वे कभी भी बिहार सरकार की सेवा में नहीं रहे हैं। अतः प्रो. बिनोद कुमार त्रिपाठी की नियुक्ति को नियमों के विरुद्ध या अनियमित बताना तथ्यों की गलत व्याख्या पर आधारित है। उनकी नियुक्ति पूरी तरह नियमों के मुताबिक और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप की गई है।
