• 1.28 लाख करोड़ रुपये की 60 परियोजनाएं पूरी कर जनता को समर्पित

• 110 परियोजनाएं 5.30 लाख करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन

• सड़क एवं राजमार्ग क्षेत्र में सबसे ज्यादा परियोजनाएं, बिहार में और मजबूत हो रहा है रेल नेटवर्क

• PRAGATI प्रणाली के माध्यम से रेलवे, सड़क, बिजली और शहरी परियोजनाओं से जुड़ी लंबित समस्याओं का हो रहा समाधान

संवाददाता. पटना

बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में 6.58 लाख करोड़ के निवेश से 170 राष्ट्रीय परियोजनाएं पूरी की जा रही है। यही वजह है कि बिहार विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि धरातल पर उतरकर तेजी से परिणाम दे रही हैं। कांग्रेस शासनकाल में योजनाओं की केवल घोषणा मात्र होती थी, लेकिन उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर कोई ठोस पहल नहीं की जाती थी। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में योजनाओं की नियमित समीक्षा और प्रगति की सख्त निगरानी की जा रही है, जिससे विकास परिलक्षित हो रहे हैं और कार्यों को गति मिल रही है।

सम्राट चौधरी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ प्रगति के माध्यम से बैठक कर 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की समीक्षा की और उन्हें तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। इसी का परिणाम है कि बिहार में भी राष्ट्रीय अवसंरचना परियोजनाएं तेज़ी से आकार ले रही हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में बिहार में कुल 170 राष्ट्रीय परियोजनाएं प्रगति पर हैं, जिनमें कुल 6.58 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। इनमें से 60 परियोजनाएं, जिनकी लागत 1.28 लाख करोड़ रुपये है, सफलतापूर्वक पूर्ण कर जनता को समर्पित की जा चुकी हैं, जबकि 110 परियोजनाएं 5.30 लाख करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न चरणों में निर्माणाधीन हैं।

परियोजनाओं की संख्या के लिहाज से सड़क एवं राजमार्ग क्षेत्र सबसे बड़ा है, जिसमें कुल 72 परियोजनाएं शामिल हैं। वहीं रेलवे क्षेत्र में 38 परियोजनाएं चल रही हैं, जो बिहार को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से और अधिक मजबूती से जोड़ रही हैं। इसके अलावा बिजली, तेल एवं गैस, दूरसंचार, शहरी अवसंरचना और जलमार्ग क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है।

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार की 41 प्रमुख परियोजनाएं प्रधानमंत्री की PRAGATI प्रणाली के अंतर्गत समीक्षा में हैं। इन परियोजनाओं में कुल 2.13 लाख करोड़ रुपये का निवेश शामिल है। इनमें से 12 परियोजनाएं, जिनकी लागत 51,833 करोड़ रुपये है, पूरी हो चुकी हैं, जबकि शेष 29 परियोजनाएं 1.62 लाख करोड़ रुपये की लागत से तेजी से प्रगति पर हैं।

PRAGATI प्रणाली के माध्यम से रेलवे, सड़क, बिजली और शहरी परियोजनाओं से जुड़ी लंबित समस्याओं का समाधान हुआ है और केंद्र एवं बिहार सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है। परियोजनाओं से जुड़े कुल 266 मुद्दों की पहचान की गई थी, जिनमें से 255 का समाधान कर लिया गया है। इससे बिहार को लगभग 96 प्रतिशत मुद्दा-समाधान दर प्राप्त हुई है।

PRAGATI परियोजनाओं से संबंधित 156 मुद्दों में से 149 का समाधान हो चुका है और वर्तमान में केवल 11 मुद्दे लंबित हैं, जिन पर सक्रिय रूप से कार्य किया जा रहा है। सबसे अधिक समस्याएं भूमि अधिग्रहण से जुड़ी थीं, जिनकी संख्या 167 रही। इसके अलावा वन एवं पर्यावरण स्वीकृतियों से जुड़े 32 और राइट ऑफ वे/राइट ऑफ यूज से जुड़े 23 मुद्दे सामने आए।

उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था, बिजली, पानी, ईंधन और निर्माण से जुड़े अधिकांश मुद्दों का समाधान कर लिया गया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से संबंधित सभी 124 मुद्दों का 100 प्रतिशत समाधान किया जा चुका है। कई प्रमुख सड़क, पुल और रेलवे परियोजनाएं 99 से 100 प्रतिशत प्रगति पर पहुंच चुकी हैं।

ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, रेल-सह-सड़क पुल और पावर प्रोजेक्ट्स को बिहार की बड़ी उपलब्धियां बताते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से राज्य में रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल रही है। अब बिहार केवल परियोजनाओं की स्वीकृति तक सीमित नहीं है, बल्कि तेज निष्पादन पर केंद्रित राज्य बन चुका है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्धता, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सहयोग लगातार प्रदान कर रही है। शेष चुनौतियों को भी समयबद्ध ढंग से सुलझाने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर निरंतर निगरानी की जा रही है। समग्र रूप से बिहार अब पूर्वी भारत में कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स और अवसंरचना का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है।

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