पटना.
राजद नेता चित्तरंजन गगन ने लाइब्रेरियन बहाली के लिए ‘लाइब्रेरियन पात्रता परीक्षा ‘ का नया नियम लागू किए जाने को सरकार द्वारा बहाली लटकाने की साज़िश करार दिया है।
राजद नेता ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के पूर्व तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा 6500 पदों पर लाइब्रेरियन बहाली का वादा किया गया था। हालांकि वास्तविक रिक्तियां इससे कहीं ज्यादा है। 2008 के बाद कभी लाइब्रेरियन की बहाली हुई हीं नहीं जबकि सभी माध्यमिक विद्यालयों में एक-एक लाइब्रेरियन का होना अनिवार्य है। 2008 में सीधे मेरिट के आधार पर बहाली हुई थी। उस समय ‘लाइब्रेरियन पात्रता परीक्षा’ जैसा कोई नियम लागू नहीं था। उस समय अभ्यार्थियों से शैक्षणिक योग्यता (जैसे लाइब्रेरी साइंस में डिग्री या डिप्लोमा – B.Lib / C.Lib) और विज्ञापित रिक्तियों के आधार पर आवेदन मंगाए गए थे, जिसमें मेधा सूची (Merit List) या तय मानकों के अनुसार नियुक्तियां की गई थीं। इस बार यह नया नियम केवल बहाली को लटकाने के उद्देश्य से हीं लागू किया गया है। सरकार केवल अभ्यार्थियों के आक्रोश को शांत करने के लिए हीं यह चाल चला गया है।
राजद नेता ने कहा कि यदि सरकार की मंशा साफ है और वह विद्यालयों में लाइब्रेरियन की बहाली करना चाहती है तो जिस नियम से 2008 में बहाली हुई थी उसी नियम के तहत नोटिफिकेशन जारी करें।
