– 7वें वेतनमान के अनुरूप पूर्ण वेतन

पटना.
बिहार स्टेट टीचर्स एसोसिएशन (BSTA) गोपगुट के आह्वान पर आज राज्यभर के शिक्षकों ने विद्यालयों में काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करते हुए सरकार की उपेक्षापूर्ण नीतियों के खिलाफ व्यापक विरोध दर्ज कराया। शिक्षकों ने छात्रों की पढ़ाई को पूरी निष्ठा से जारी रखते हुए सरकार को स्पष्ट चेताया कि उनके हक और सम्मान की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रमुख मांगें:
* 7वें वेतनमान के अनुरूप पूर्ण वेतन: सभी कोटि के शिक्षकों, विद्यालय अध्यापकों, विशिष्ट शिक्षकों, प्रधान शिक्षकों एवं प्रधानाध्यापकों को 7वें वेतन आयोग (7th Pay) के अनुसार पूर्ण वेतनमान और भत्ते तत्काल प्रभाव से लागू किए जाएं।

* पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली: एनपीएस (NPS) रूपी असुरक्षित व्यवस्था को समाप्त कर सभी संवर्गों के शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए।

* वेतन एवं सेवा विसंगतियों का निवारण: सेवा शर्तों में सुधार करते हुए सभी लंबित विसंगतियों को दूर किया जाए।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मार्कण्डेय पाठक ने कहां कि हम कक्षा में बच्चों का भविष्य संवारते हैं, लेकिन सरकार ने शिक्षकों के ही भविष्य को असुरक्षा और अंधकार में धकेल रखा है। राष्ट्र निर्माता कहलाने वाले शिक्षकों को जब अपने वाजिब हक, सम्मानजनक वेतन और बुढ़ापे के सहारे (OPS) के लिए सड़कों पर उतरना पड़े, तो यह व्यवस्था की सबसे बड़ी विफलता है। आज का यह सांकेतिक विरोध सरकार के लिए अंतिम चेतावनी है। हम कलम के सिपाही हैं, लेकिन अपने आत्मसम्मान के लिए गांधीवादी रास्ते पर चलकर निर्णायक लड़ाई लड़ना भी जानते हैं।

आगामी चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा:
* 05 सितंबर (शिक्षक दिवस): उपेक्षा और अनदेखी के खिलाफ राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर विशाल एवं शांतिपूर्ण सत्याग्रह।
* 02 अक्टूबर (गांधी जयंती): यदि सरकार वार्ता कर ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो राजधानी पटना में शिक्षक ऐतिहासिक आमरण अनशन शुरू करेंगे, जिसकी संपूर्ण जवाबदेही राज्य सरकार की होगी।