संवाददाता. पटना

चूंकि सरकार ने 25 जून, 2026 तक वेतन और पेंशन के नियमित भुगतान के लिए कोई रास्ता निकालने के हमारे अनुरोध पर ध्यान नहीं दिया है, इसलिए इस पूरी स्थिति पर तत्काल सम्यकोपरांत विचार करते हुए यह निर्णय लिया गया है कि जैसा कि पहले घोषित किया गया था, 01 जुलाई को महाविद्यालयों से लेकर विश्वविद्यालयों के मुख्यालयों तक सभी 13 पारंपरिक विश्वविद्यालयों में हमारा राज्यव्यापी प्रतिरोध-प्रदर्शन जोरदार तरीके से मनाया जाएगा। फुटाब कार्यकारी अध्यक्ष प्रो.कन्हैया बहादुर सिन्हा और महासचिव विधान पार्षद प्रो.संजय कुमार सिंह ने ये बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि उम्मीद थी कि आपातकाल विरोधी सरकार 25 जून (आपातकाल दिवस) तक विश्वविद्यालयों को वित्तीय आपातकाल से मुक्त कर देगी और वेतन और पेंशन के नियमित भुगतान के लिए एक प्रभावी प्रणाली लागू कर देगी, लेकिन ऐसी प्रणाली की अभी बात क्या करें! विश्वविद्यालयों के वेतनभोगियों एवं पेंशनभोगियों को तीन महीने का लम्बित वेतन एवं पेंशन आज तक नहीं मिल पाया है, क्योंकि पोर्टल की सुस्ती एवं नियमित विफलता के कारण विश्वविद्यालय को पुराने से नए खाते में स्थानांतरण के विवरण नहीं मिल पा रहे हैं। जिन भी विश्वविद्यालयों यथा; मगध, पाटलिपुत्र, जयप्रकाश विश्वविद्यालय आदि में भुगतान हुआ भी है, वह आंतरिक स्त्रोत-व्यवस्था से किया गया है। जबकि अन्य विश्वविद्यालयों वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय अभी तीन महीने का वेतन व पेंशन का भुगतान करने में सक्षम नहीं है। वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय अपने संसाधनों से किसी तरह केवल एक महीने के पेंशन का ही प्रबंधन कर सका है। बी.आर ए. बिहार विश्वविद्यालय में कार्यरत और सेवानिवृत्त दोनों को आज तक एक माह का भी वेतन एवं पेंशन नहीं मिल पाया है। ऐसा अन्य शेष विश्वविद्यालयों का भी हाल है। साथ ही फुटाब के नेताओं ने कहा कि राज्य के 211 प्रखंडों के नये राजकीय डिग्री महाविद्यालयों में बिना सहमति के किसी की प्रतिनियुक्ति नहीं की जाए। क्योंकि जो भी प्रतिनियुक्ति हुई है, उनमें अधिकांश प्रभारी प्राचार्य एवं अर्थपाल (बर्सर) की प्रतिनियुक्ति बिना सहमति सम्बन्धित पदस्थापित जिले में न कर दूर जिले में करने सम्बन्धी जो प्रताड़नापूर्ण व मनमाना व्यवहार किया गया या किया जा रहा है, उसकी विसंगति को दूर कर इसके लिए अब तक एक उचित मापदंड निर्धारित नहीं किया गया है।

ये सभी स्थितियाँ हमें 01 जुलाई, 2026 को हमारे घोषित राज्यस्तरीय प्रतिरोध कार्यक्रम पर मजबूती से चलने के लिए विवश करती हैं। पूर्व घोषित राज्य स्तरीय प्रतिरोध-कार्यक्रम है-

1. (I) राज्य के सभी महाविद्यालयों की शिक्षक संघ इकाई अपने-अपने महाविद्यालय में कार्य-दायित्व-निर्वहन के साथ एक घंटे तक प्रतिरोध-प्रदर्शन करेंगे।
(ii) प्रतिरोध-प्रदर्शन में उस महाविद्यालय के पेंशनर्स भी भाग लेंगे।

2. विश्वविद्यालय स्नातकोतर शिक्षक संघ इकाई भी अपनी मांगों के समर्थन में विश्वविद्यालय मुख्यालय में 01 घंटे का प्रतिरोध-प्रदर्शन आयोजित करेगी, जिसमें विश्वविद्यालय विभागों सहित मुख्यालय पर मौजूद सभी पेंशनर्स भी शामिल होंगे।

फुटाब नेताओं ने कहा कि महाविद्यालय शिक्षक संघ इकाई अपने महाविद्यालय के प्राचार्य और विश्वविद्यालय स्नातकोतर शिक्षक संघ इकाई वि.वि. प्रशासन को अपने मांगों से सम्बन्धित एक ज्ञापन भी सौंपेगा।

नारा–(i) ‘विश्वविद्यालयों को वित्तीय आपातकाल से मुक्त करो’
(ii) ‘हर महीने की पहली तारीख को वेतन एवं पेंशन का भुगतान किया जाए’।
(iii) ‘अधिकारियों की मनमानी और तानाशाही को रोका जाए’।
(iv) ‘शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति शीघ्र सुधारी जाए’।