सम्राट कैबिनेट की बैठक खत्म 17 एजेंडों पर लगी मुहर।
बिहार सरकार ने जल संसाधन विभाग को आकस्मिकता निधि से 1000 करोड़ रुपए की अग्रिम राशि दी है।
इस पैसे का इस्तेमाल बाढ़ से बचाव और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी कामों के साथ-साथ सिंचाई से जुड़े कार्यों में किया जाएगा।
इसमें प्रगति यात्रा से जुड़े काम, बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य, जल-जीवन-हरियाली अभियान और अन्य महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं।
ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने के लिए 2.10 करोड़ मंजूर
बिहार सरकार के कृषि विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल पाम (NMEO-OP) योजना के तहत 2 करोड़ 10 लाख रुपए खर्च करने की मंजूरी दी है।
इस योजना के तहत बिहार में ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।
इसका उद्देश्य किसानों को ऑयल पाम की खेती के लिए प्रोत्साहित करना और राज्य में खाद्य तेलों का उत्पादन बढ़ाना है।
सरकार का मानना है कि इस योजना से देश को खाद्य तेल के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
बिहार के सभी 38 जिलों में 1 जुलाई से नई ग्रामीण रोजगार योजना लागू
बिहार के सभी 38 जिलों में 1 जुलाई 2026 से विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी विकसित भारत-जी राम जी योजना लागू की जाएगी।
ग्रामीण विकास विभाग ने इसके क्रियान्वयन की जानकारी दी है।
हर परिवार को 125 दिन रोजगार का प्रावधान
योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुरक्षा मजबूत करना और गांवों में टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण कर विकास को बढ़ावा देना है।
योजना के तहत किसी परिवार के इच्छुक वयस्क सदस्य काम मांगते हैं, तो उन्हें एक वित्तीय वर्ष में 125 दिन तक अकुशल मजदूरी वाला रोजगार देने का प्रावधान किया गया है।
शिकायतों के समाधान के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था
योजना में ग्रामीण श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और काम के दौरान पूरी पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। इसके लिए ग्रामीण स्तर पर रोजगार से जुड़ी समस्याओं और शिकायतों के त्वरित और समयबद्ध समाधान के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था तैयार की गई है।
खनन प्रभावित इलाकों के विकास के लिए नई नियमावली लागू
बिहार सरकार ने जिला खनिज फाउंडेशन (संशोधन) नियमावली, 2026 लागू कर दी है।
इसके तहत खनन से प्रभावित जिलों और क्षेत्रों में विकास एवं कल्याण से जुड़ी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।
नई नियमावली का उद्देश्य खनन के दौरान और उसके बाद होने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम करना है।
साथ ही, खनन से प्रभावित लोगों के लिए लंबे समय तक चलने वाली स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
इसके लागू होने से खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकासात्मक और कल्याणकारी परियोजनाओं का सुचारू, प्रभावी और पारदर्शी तरीके से क्रियान्वयन किया जा सकेगा।
बिहार में विमानन विभाग के पदों पर भर्ती के लिए नई नियमावली को मंजूरी
बिहार सरकार ने सिविल विमानन विभाग में तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों पर भर्ती एवं प्रोन्नति के लिए ‘बिहार राज्य विमानन संवर्ग भर्ती नियमावली, 2026’ के गठन को मंजूरी दी है।
पायलट और इंजीनियर समेत पदों पर भर्ती होगी
राज्य में विशिष्ट और अति विशिष्ट लोगों के हवाई आवागमन, राज्य के हवाई अड्डों के विकास, आपदा के समय हवाई मार्ग से सहायता पहुंचाने और बिहार उड्डयन संस्थान के माध्यम से पायलटों को प्रशिक्षण देने जैसे कामों के लिए सिविल विमानन विभाग का गठन किया गया है।
विभाग में सरकारी विमान और हेलिकॉप्टर के संचालन एवं रखरखाव के लिए पायलट, इंजीनियर समेत तकनीकी और गैर-तकनीकी पद बनाए गए हैं।
योग्यता और उम्र सीमा भी तय होगी
नई नियमावली के तहत इन पदों पर भर्ती और प्रोन्नति की प्रक्रिया तय की गई है। इसमें अलग-अलग पदों के लिए संवर्ग और उपसंवर्ग, पद की प्रकृति, शैक्षणिक योग्यता, उम्र सीमा और भर्ती से जुड़े अन्य नियम निर्धारित किए गए हैं।
सरकार का कहना है कि नई नियमावली से सिविल विमानन विभाग का संचालन बेहतर और मजबूत होगा तथा विभाग में खाली पदों पर भर्ती की प्रक्रिया को व्यवस्थित किया जा सकेगा।
बिहार में छोटे शहरों तक बढ़ेगा हवाई संपर्क, नए एयर रूट और हेलीपोर्ट विकसित होंगे
बिहार में हवाई संपर्क बढ़ाने के लिए Modified UDAN Scheme के तहत केंद्र और राज्य सरकार के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) को मंजूरी दी गई है।
इसके तहत नागर विमानन मंत्रालय, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) और बिहार सरकार के बीच जिम्मेदारियां तय होंगी।
नए हवाई मार्गों को मिलेगी वित्तीय मदद
MoU के बाद राज्य सरकार की ओर से प्रस्तावित नए हवाई मार्गों को उड़ान योजना के तहत वित्तीय सहायता मिल सकेगी। इससे कम यात्री वाले हवाई मार्गों को भी शुरुआती समय में संचालित रखने में मदद मिलेगी।
एयरपोर्ट और हेलीपोर्ट होंगे विकसित
Modified UDAN Scheme के तहत बिहार के अलग-अलग हवाई अड्डों का विकास चैलेंज मोड में किया जाएगा। इसके अलावा राज्य के आकांक्षी जिलों में हेलीपोर्ट भी विकसित किए जाएंगे।
हेलीपोर्ट बनने से इन जिलों में हवाई संपर्क बेहतर होने के साथ आपातकालीन सेवाओं और पर्यटन को भी फायदा मिलेगा।
पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
सरकार की इन पहलों से बिहार के छोटे शहरों को हवाई सेवा से जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।
बिहार के 5 मेडिकल कॉलेजों में 366 सहायक प्राध्यापक की होगी संविदा पर नियुक्ति
बिहार के 5 राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में 366 सहायक प्राध्यापक के रिक्त पदों पर संविदा के आधार पर नियुक्ति की जाएगी। यह नियुक्ति नियमित बहाली होने तक की जाएगी।
इन पदों पर नियुक्ति राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, बेतिया, पूर्णिया, जननायक कर्पूरी ठाकुर चिकित्सा महाविद्यालय मधेपुरा, राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय छपरा और श्री राम जानकी चिकित्सा महाविद्यालय समस्तीपुर में होगी।
NMC के मानकों के अनुसार शिक्षक होंगे उपलब्ध
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, संविदा पर चिकित्सक शिक्षकों की नियुक्ति का उद्देश्य मेडिकल कॉलेजों में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC), नई दिल्ली के निर्धारित मानकों के अनुसार शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
नियमित नियुक्ति होने तक इन मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई और शैक्षणिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में इन नियुक्तियों से मदद मिलेगी।
बिहार के सरकारी दंत कॉलेजों में संविदा पर शिक्षकों की होगी नियुक्ति
बिहार के राजकीय दंत महाविद्यालय एवं अस्पतालों में खाली पड़े प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक/रीडर और व्याख्याता/सहायक प्राध्यापक के पदों पर संविदा के आधार पर नियुक्ति की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह नियुक्ति नियमित बहाली या प्रोन्नति होने तक की जाएगी। इसका उद्देश्य दंत महाविद्यालयों और अस्पतालों में पढ़ाई एवं शैक्षणिक व्यवस्था को सुचारू रखना है।
भारतीय दंत परिषद के मानकों के अनुसार होगी व्यवस्था
संविदा पर शिक्षकों की नियुक्ति से दंत महाविद्यालयों में भारतीय दंत परिषद (Dental Council of India), नई दिल्ली के मानकों के अनुरूप दंत चिकित्सक शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।
इससे दंत चिकित्सा की पढ़ाई और प्रशिक्षण की व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
बिहार में मखाना विकास के लिए 89.79 करोड़ रुपए मंजूर, उत्पादन से निर्यात तक मजबूत होगी व्यवस्था
बिहार सरकार के कृषि विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में मखाना विकास योजना के तहत 89 करोड़ 79 लाख 68 हजार 400 रुपए खर्च करने की मंजूरी दी है।
यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका उद्देश्य बिहार में मखाना उत्पादन और इससे जुड़े कारोबार को बढ़ावा देना है।
उत्पादन से बाजार तक पूरी व्यवस्था मजबूत होगी
योजना के तहत मखाना की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत किया जाएगा। इसमें मखाना उत्पादन और बीज उत्पादन के साथ किसानों को प्रशिक्षण एवं कौशल विकास दिया जाएगा। एकीकृत खेती और नई तकनीक के इस्तेमाल के लिए खेतों में प्रत्यक्षण भी कराया जाएगा।
बिहार में बागवानी विकास के लिए 78.34 करोड़ मंजूर, फल-फूल और मशरूम की खेती को मिलेगा बढ़ावा
बिहार सरकार के कृषि विभाग ने एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2027-28 तक दो साल के लिए 78 करोड़ 34 लाख 22 हजार 40 रुपए की योजना को मंजूरी दी है। वहीं, वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए 68 करोड़ 66 लाख 22 हजार 40 रुपए खर्च करने की स्वीकृति दी गई है।
फल-फूल और मशरूम की खेती बढ़ेगी
योजना के तहत राज्य में फल, फूल, सुगंधित पौधे और मशरूम जैसी बागवानी फसलों का उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने पर काम किया जाएगा। किसानों को अच्छी गुणवत्ता की पौध रोपण सामग्री उपलब्ध कराने के साथ फलों की खेती का क्षेत्र भी बढ़ाया जाएगा।
पुराने बागों का होगा जीर्णोद्धार
योजना के तहत पुराने और खराब हो चुके बागों के जीर्णोद्धार, सुगंधित पौधों और मशरूम की खेती को …
गया में 3,516 करोड़ से बनेगा विष्णुपद कॉरिडोर, सोन-फल्गु नदी जुड़ेगी
गया के विष्णुपद मंदिर क्षेत्र का काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकास होगा। इसके लिए 2,520 करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी दी गई है। साथ ही 996.05 करोड़ रुपए से सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना पर काम होगा। दोनों योजनाओं की कुल लागत 3,516.05 करोड़ रुपए है।
कॉरिडोर में मंदिर परिसर, मल्टीलेवल पार्किंग, एलीवेटेड पथ, घाट, पैदल पुल, डोरमेट्री, कैंटीन और श्रद्धालुओं के लिए अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
सोन-फल्गु योजना के तहत सोन नदी का पानी पाइपलाइन के जरिए उत्तर कोयल मुख्य नहर तक पहुंचाया जाएगा। योजनाओं से गया में धार्मिक पर्यटन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बढ़ावा मिलेगा।
बिहार में जलस्रोतों की गाद निकलेगी, निर्माण कार्य में मिट्टी के रूप में होगा इस्तेमाल
बिहार सरकार नदियों, बराजों और जलाशयों में जमा गाद निकालकर उसका इस्तेमाल निर्माण कार्यों में करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए ‘बिहार जलस्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति, 2026’ प्रस्तावित की गई है।
नीति के तहत जलस्रोतों से गाद निकालकर उनकी जल धारण और जल वहन क्षमता बढ़ाई जाएगी। निकाली गई गाद का इस्तेमाल सड़क, रेलवे, सिंचाई, बाढ़ सुरक्षा और भवन निर्माण जैसी परियोजनाओं में मिट्टी भराई के लिए किया जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि इससे जलस्रोतों की क्षमता बहाल होगी, बाढ़ का जोखिम कम करने में मदद मिलेगी और उपजाऊ मिट्टी के अनावश्यक इस्तेमाल पर भी रोक लगेगी।
