संवाददाता.

बिहार के लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री विनोद नारायण झा ने कहा है कि राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश की के साथ जो घटना घटी है उससे पूरे बिहार को आघात लगा है। सभापति के आसन पर बैठा व्यक्ति संविधान का कस्टोडियन होता है इसलिए यह अपमान संविधान का हुआ है। झा आज यहां प्रदेश भाजपा के कैलाशपति मिश्र मीडिया सेंटर में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे । उन्होंने कहा कि समूचा बिहार इससे दुखी है लेकिन आश्चर्य है कि राजद ऐसे लोगों के पक्ष में खड़ा है, उन्हें बचा रहा है। आक्रमण करने वाले के बचाव में राजद के खड़ा रहना बिहार को और भी दुख पहुंचा रहा है। बिहार के बेटे हरिवंश जी के साथ हुआ दुर्व्यवहार बेहद ही निंदनीय है। ‘लोकतंत्र’ को ‘गुंडातंत्र’, में बदलने पर आमदा विपक्ष के इस अमर्यादित बर्ताव एवं व्यवहार की जितनी निंदा की जाए उतनी कम है। विशेष तौर पर जिस तरह बिहार में राजद के नेताओं ने भी हरिवंश जी पर अपमानजनक टिप्पणियां की है उससे बिहार वासियों को अघात लगा है। संघर्ष से अपनी पहचान और यश अर्जित करने वाले बिहार के बेटे प्रति विपक्ष की ये दुर्भावना उनकी संकीर्ण सोच को दर्शाती है।
झा ने कहा कि हरिवंश जी के साथ दुर्व्यवहार करने वाले सांसद नौटंकी करने के लिए संसद में धरने पर बैठ गए लेकिन हरिवंश जी ने गांधी जी के मार्ग पर चलते हुए उनका अपमान करने वाले से बदला नहीं बल्कि स्नेह किया और उनके लिए आज सुबह खुद चाय लेकर बातचीत करने गए। हरिवंश जी का यह व्यवहार उनकी महानता को दर्शाता है। झा ने कहा कि राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश जी के साथ विपक्ष के आचरण न केवल बिहार बल्कि पूरा देश क्षुब्ध है, हरिवंश जी बिहार से है, इसको लेकर हर बिहारवासी अपने आप को अपमानित महसूस कर रहे हैं।
हरिवंश जी विद्वान संपादक हैं। उन्होंने न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी भारत की पताका फहरायी है। ऐसे विद्वान, ऐसे महान व्यक्तित्व के साथ जिस तरह की घटना टीएमसी के सांसद डेरेक ओ ब्रायन और आप के सांसद संजय सिंह ने की, वह बेहद गलत, शर्मनाक और हतप्रभ करनेवाला है। संजय सिंह और बाकी जो छह सांसद निलंबित हुए हैं, उनको आरजेडी और कांग्रेस जिस तरह से बढ़ावा दे रही है, वह भी बेहद निंदनीय है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि आरजेडी भी बिहार की अस्मिता पर लगी इस चोट पर खामोश है। सुंदर बात तो यह है कि हरिवंश जी खुद आज एक दिन के उपवास पर हैं वह बिहार के हैं और बिहार ने दुनिया को लोकतंत्र दिया था। आज हरिवंश जी उसी लोकतंत्र को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। मुझे लगता है कि यदि विपक्षी सांसदों में तनिक भी शर्म बची होगी तो वह हरिवंश जी से माफी मांगेंगे और अपनी सदस्यता से इस्तीफा भी देंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *