100 दिन भूमि सुधार के : राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी, समयबद्ध और जनोन्मुख बनाने की दिशा में कई बड़े फैसले
उपमुख्यमंत्री सह मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग श्री विजय कुमार सिन्हा के नेतृत्व में आमूल चूल परिवर्तन की हुई शुरुआत
जो भी बीमारी दिखी उसको दूर करने का शुरू हुआ है प्रयास, अब तक निकले सुधारात्मक तीन दर्जन से अधिक परिपत्र
संवाददाता. पटना
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार में नई सरकार बनने के बाद कहा था कि 100 दिन बाद सरकार के कामकाज का हिसाब जनता को बताएंगे। उससे पहले राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री सह उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अपने विभाग के 100 दिनों के कामकाज का ब्योरा सोमवार को जनता के सामने रखा।
बताया गया कि सबसे महत्वपूर्ण पहल के रूप में जमीन से संबंधित सभी सेवाओं के लिए बिहारभूमि पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था लागू की गई है। जिन लोगों को ऑनलाइन आवेदन की जानकारी नहीं है, उनकी सहायता के लिए प्रत्येक अंचल कार्यालय में सीएससी केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां प्रशिक्षित ऑपरेटर आम लोगों को आवेदन करने में मदद कर रहे हैं। जनता की समस्याओं को दूर करने के उद्देश्य से अब तक तीन दर्जन से अधिक सुधारात्मक परिपत्र निकाले जा चुके हैं। जनता की समस्याओं को सीधे सुनने के उद्देश्य से 12 दिसंबर से “भूमि सुधार जनकल्याण संवाद” कार्यक्रम की शुरुआत पटना से की गई। इसके तहत अब तक लखीसराय, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, सहरसा, भागलपुर, गया और दरभंगा में कार्यक्रम आयोजित कर लोगों की शिकायतें सुनी गईं और उनके समाधान की दिशा में कार्रवाई की गई।
विभाग ने पहली बार परिमार्जन के मामलों में स्पष्ट समय सीमा निर्धारित की। लिपिकीय या टाइपिंग त्रुटियों के सुधार के लिए अधिकतम 15 कार्य दिवस, खाता-खेसरा और अन्य तकनीकी त्रुटियों के सुधार के लिए 35 कार्य दिवस तथा जटिल मामलों में जांच के बाद अधिकतम 75 कार्य दिवस की समय सीमा तय की गई है। भूमि मापी की प्रक्रिया को भी समयबद्ध किया गया है। अविवादित भूमि की मापी 7 दिन में और विवादित भूमि की मापी 11 दिन में पूरी करने का निर्देश दिया गया है। मापी प्रतिवेदन को 14 दिन के भीतर पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। दाखिल-खारिज प्रक्रिया को तेज करते हुए बिना आपत्ति वाले मामलों का निष्पादन 14 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया गया है, जबकि पहले इसकी समय सीमा 35 दिन थी।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि विवादों में पुलिस के अनावश्यक हस्तक्षेप को रोकने के लिए सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि भूमि विवाद राजस्व और न्यायिक प्रक्रिया का विषय है। पुलिस का दायित्व केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। अनुसूचित जाति-जनजाति पर्चाधारियों को जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए “ऑपरेशन भूमि दखल देहानी” अभियान शुरू किया गया है। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में वंशावली निर्गत करने की जिम्मेदारी अंचलाधिकारियों को सौंपी गई है। परिवारिक बंटवारे की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए पारिवारिक बंटवारा पोर्टल की शुरुआत की गई है, जिसके माध्यम से बंटवारा और दाखिल-खारिज के लिए एक साथ ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। इससे सभी हिस्सेदारों के नाम स्वतः अलग-अलग दाखिल-खारिज हो सकेंगे। 1 जनवरी से राजस्व अभिलेखों की सत्यापित नकल केवल ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही है और “चिरकुट फाइल” से नकल निकालने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। डिजिटल हस्ताक्षरित प्रति को वैधानिक मान्यता प्रदान की गई है। फर्जी दस्तावेज लगाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते हुए अनिवार्य एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। अब तक इस मामले में दर्जन भर से अधिक मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। राजस्व न्यायालयों में सुधार करते हुए न्यायालय प्रबंधन प्रणाली को पूर्णतः ऑनलाइन किया गया है और समान मामलों में समान निर्णय सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।
बताया गया कि जनसुनवाई व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए 19 जनवरी से सभी राजस्व कार्यालयों में सोमवार और शुक्रवार को जनसुनवाई तथा प्रत्येक शनिवार को अंचल कार्यालयों में जनता दरबार आयोजित करने की व्यवस्था की गई है। औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सभी जिलों में लैंड बैंक बनाने का निर्देश दिया गया है। साथ ही सरकारी भूमि की सुरक्षा के लिए दाखिल-खारिज मामलों के त्वरित निष्पादन पर जोर दिया गया है। राजस्व महा-अभियान के तहत 16 अगस्त से 20 सितंबर 2025 के बीच प्राप्त 46 लाख आवेदनों के निष्पादन का लक्ष्य 31 मार्च तक निर्धारित किया गया है, जिनमें लगभग 40 लाख आवेदन परिमार्जन से जुड़े हैं। पुराने दस्तावेजों की समस्या दूर करने के लिए कैथी लिपि के दस्तावेजों के अनुवाद हेतु विशेषज्ञों का पैनल बनाया गया है। 29 विशेषज्ञों को प्रशिक्षण देकर जिलों में जिम्मेदारी दी गई है और अनुवाद की दर 220 रुपये प्रति पृष्ठ निर्धारित की गई है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति लागू करते हुए मसौढ़ी के राजस्व कर्मचारी को 23 दिनों में बर्खास्त किया गया है, जबकि अररिया के एक कर्मचारी को निलंबित कर बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू की गई है। शहीद सैनिकों के परिजनों, विधवाओं और दिव्यांगजनों के मामलों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है।
इसके साथ ही फार्मर रजिस्ट्री अभियान के तहत 45 लाख से अधिक किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है। राजस्व मुकदमों के निष्पादन में तेजी लाने के लिए विभिन्न स्तर के न्यायालयों में वादों के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है और “डेट पर डेट” की परंपरा समाप्त करने का निर्देश दिया गया है। इसके अतिरिक्त अंचल कार्यालयों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए राज्य के सभी 537 अंचल कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए 6.71 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। विभाग का लक्ष्य राज्य के प्रत्येक अंचल में पारदर्शी, जवाबदेह और जनविश्वास आधारित राजस्व प्रशासन स्थापित करना है, ताकि आम नागरिकों को जमीन से जुड़े कार्यों में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इस मौके पर विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल एवं कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल भी उपस्थित थे।
