संवाददाता. पटना
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार ने जनता दल यूनाइटेड की सदस्यता रविवार को जेडीयू कार्यालय में ले ली। उन्हें विजेन्द्र यादव, संजय झा और ललन सिंह के बीच बैठाया गया। इस क्षण की तैयारी काफी समय से की जा रही थी। 6 मार्च को पार्टी के विधानमंडल सदस्यों और सांसदों के साथ नीतीश कुमार की हुई आपात बैठक के बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि निशांत पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं। निशांत को रविवार के दिन जेडीयू कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जेडीयू की सदस्यता दिलायी जा रही थी तब बिहार का मुख्यमंत्री कैसा हो निशांत कुमार जैसा हो के नारे लगने लगे। नीतीश कुमार रविवार के आयोजन में शामिल नहीं होकर कुछ और मैसेज देना चाह रहे हैं लेकिन आयोजन के बाद जब मुख्यमंत्री आवास निशांत पहुंचे तो नीतीश कुमार की खुशी का ठिकाना नहीं था। संजय झा, निशात कुमार और नीतीश कुमार ने एक साथ फोटो खिंचवाया।
जनता दल यूनाइटेड के नेता कुछ कहें लेकिन यह मैसेज लोगों में चला गया कि जो नीतीश कुमार परिवारवाद का विरोध करते थे उन्होंने अपने बेटे को जेडीयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए जेडीयू में शामिल कराया। अंदरखाने चर्चा रही कि जेडीयू को बचाने के लिए यह जरूरी था। इससे ठीक दो दिन पहले अमित शाह की उपस्थिति में नीतीश कुमार ने राज्यसभा की सदस्यता के लिए नामांकन भरा।
समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी कहते हैं कि नीतीश कुमार की पार्टी में फ़िलहाल ऐसा कोई नहीं है, जो पूरी पार्टी को एक साथ जोड़ कर रख सके।
वो कहते हैं कि ऐसी स्थिति में धीरे-धीरे दो ही विकल्प खुलेंगे, पहला कि लोग बीजेपी में जाएं और दूसरा आरजेडी में। शिवानंद तिवारी जनता दल यूनाइटेड के सामने खड़े नेतृत्व के इस संकट के लिए नीतीश कुमार को ही ज़िम्मेदार मानते हैं। कहते हैं कि नीतीश कुमार के साथ सबसे बड़ी दिक्कत रही कि उन्होंने किसी पर भरोसा ही नहीं किया। आरसीपी सिंह एक ज़माने में उनके नज़दीकी थे, मगर आरसीपी ख़त्म हो गए। प्रशांत किशोर आए…तब उनके बारे में उन्होंने कहा कि यही हमारे भविष्य हैं, पर वह भी ख़त्म हो गए। तो उन्होंने किसी ऐसे को आगे नहीं किया, जो पार्टी को जोड़कर रख सके। अब नतीजा ये है कि नीतीश कुमार गए तो पार्टी बचेगी या नहीं इस पर बहस हो रही है।
नीतीश कुमार के करीबी रहे पूर्व एमएलसी प्रेम कुमार मणि कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के बाद उनके बेटे अखिलेश यादव आए, बिहार में लालू प्रसाद यादव के बाद उनके बेटे तेजस्वी यादव आगे बढ़े और अब नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के आने की बात हो रही है। इसे आप कबायली सोच भी कह सकते हैं और जातिवादी राजनीति का गणित भी। मैं निशांत को बचपन से जानता हूं। वह बहुत प्यारा बच्चा है और उसमें किसी तरह का लोभ नहीं है,लेकिन वह बिल्कुल भी राजनीतिक व्यक्ति नहीं है। अगर वह पार्टी में कोई पद पा भी जाते हैं, तो हो सकता है कुछ महीनों या सालभर तक टिक जाएं, लेकिन बिना किसी राजनीतिक समझ और विचार के राजनीति करना संभव नहीं है।
