संवाददाता. पटना
पटना के बंहुचर्चित नीट (NEET) छात्रा रेप-हत्याकांड की जांच सीबीआई (CBI) से कराने की अनुशंसा शनिवार को बिहार सरकार ने केन्द्र से कर दी। पटना पुलिस की नाकामी के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया। इस मामले को लेकर सरकार ने एसआईटी बनाया था। लेकिन उसकी भी नाकामी दिखती रही।
पटना में एक छात्रा (NEET एस्पिरेंट) की मौत को परिवार द्वारा दुष्कर्म और हत्या बताया जाता रहा, दूसरी तरफ पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में रही। विभिन्न संगठन इसको लेकर सड़क पर आंदोलन कर रहे थे और बिहार विधान सभा का बजट सत्र 2 फरवरी से शुरू होने वाला है। सरकार काफी दबाव में थी। एआईएसएफ,आईसा जैसे संगठन आंदोलन कर रहे थे।
सम्राट चौधरी ने इस मामले में एक्स पर लिखा – ‘बिहार के माननीय मुख्यमंत्री श्री @NitishKumar जी ने भारत सरकार से पटना में हुए NEET छात्रा की हत्या के मामले (कांड संख्या- 14/26) को CBI से जांच का आग्रह किया है। घटना का पारदर्शी और न्यायपूर्ण तरीके से उद्भेदन निश्चित किया जाए।’
बिहार सरकार की सिफारिश के बाद केन्द्र सरकार ने CBI जांच की अनुमति दे दी है।
माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा है कि ‘केवल CBI जांच की सिफारिश पर्याप्त नहीं है। यह जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी सीटिंग जज की निगरानी में होनी चाहिए ताकि निष्पक्ष और भरोसेमंद जांच हो सके।’
घटना की टाइमलाइन
– 5 जनवरी, 2026: छात्रा जहानाबाद से ट्रेन से पटना पहुंची और चित्रकूट नगर के एक निजी हॉस्टल (शंभू गर्ल्स हॉस्टल) में रहने आई। लड़की की उम्र 16-17 वर्ष बताई गई।
– 6 जनवरी, 2026: छात्रा हॉस्टल के कमरे में बेहोश पाई गई। उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह कई दिनों तक कोमा में रही।
-11 जनवरी, 2026: पटना के अस्पताल में इलाज के दौरान छात्रा की मौत हो गई।
पुलिस की शुरुआती जांच- पटना पुलिस ने प्रारंभिक जांच में मामले को आत्महत्या का मामला बताया और कहा कि मौत नींद की गोलियों की अधिकता (Overdose) के कारण हुई।
– 13 जनवरी, 2026: पुलिस ने कहा कि डॉक्टरों को यौन शोषण के कोई सबूत नहीं मिले।
– 24-25 जनवरी, 2026: फोरेंसिक रिपोर्ट (FSL) ने पुलिस के दावे को गलत साबित कर दिया। छात्रा के कपड़ों पर वीर्य (Semen) के निशान मिले, जो यौन शोषण की पुष्टि करते हैं।
– 27 जनवरी, 2026: मामले में एफएसएल रिपोर्ट के आधार पर SIT (विशेष जांच दल) ने जांच तेज की। हॉस्टल मालिक और स्टाफ से पूछताछ हुई और DNA नमूने लिए गए।
-28 जनवरी, 2026: परिजनों ने बिहार पुलिस की जांच पर अविश्वास जताते हुए न्याय न मिलने पर आत्मदाह की धमकी दी।
-31 जनवरी, 2026: बिहार सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) को सौंपने की सिफारिश की।
