संवाददाता. पटना

  • स्पीडी ट्रायल चलाकर अपराधी को कड़ी सजा देने की मांग
  • हर मोर्चे पर सरकार विफल भाजपा – जदयू शासन के गिनती के दिन
  • बिहार में बदलाव की दरकार

मुजफ्फरपुर के कुढ़नी प्रखंड स्थित जगन्नाथपुर गांव में 10 वर्षीय दलित समुदाय की नाबालिग बच्ची के साथ हुई बर्बर यौन हिंसा और इलाज में हुई घोर लापरवाही के कारण हुई मृत्यु के लिए स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे को जिम्मेवार मानते हुए उनके इस्तीफे और स्पीडी ट्रायल चलाकर अपराधी को कड़ी सजा देने की मांग पर बुधवार को पूरे बिहार में माले – ऐपवा के बैनर से विरोध दिवस आयोजित हुआ। पटना सहित कई अन्य प्रमुख जिला केंद्रों पर यह प्रदर्शन हुआ, जिसमें बिहारशरीफ, सिवान, बक्सर में डुमरांव, दरभंगा, गोपालगंज, आरा, गया आदि शामिल हैं। पटना में जीपीओ गोलंबर से आक्रोश मार्च निकला जिसमें आइसा और RYA भी शामिल था. प्रतिवाद कार्यक्रम में वक्ता के रूप में एमएलसी शशि यादव , विधायक गोपाल रविदास, सरोज चौबे, रणविजय कुमार,प्रीति कुमारी, माधुरी गुप्ता ने संबोधित किया।

मौके पर के डी यादव, प्रकाश कुमार, उमेश सिंह, रामबली प्रसाद, जितेंद्र कुमार, सबीर कुमार, जयप्रकाश पासवान, कमलेश कुमार, अनिल अंशुमन, मुर्तजा अली, राखी मेहता, गुरुदेव दास, मिथिलेश कुमार, मीरा दत्त, अनुराधा सिंह, विनय कुमार, पुनीत पाठक, नीतीश कुमार, महेश चंद्रवंशी, विभा गुप्ता, मुजफ्फर आलम, देवीलाल, प्रमोद यादव, वंदना प्रभा, कुमार दिव्यम, नीतीश कुमार, गुलशन, आशा देवी आदि उपस्थित थे। संचालन अनीता सिन्हा ने किया।

गोपाल रविदास ने कहा कि मुजफ्फरपुर की घटना राज्य सरकार की दोहरी विफलता को दर्शाती है—पहली, एक नाबालिग बच्ची के साथ अमानवीय बलात्कार; दूसरी, उपचार में आपराधिक उपेक्षा। मंत्री मंगल पांडे इस विफलता की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा दें। उन्होंने कहा कि राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीएमसीएच में बलात्कार पीड़िता के इलाज को लेकर जो लापरवाही सामने आई है, वह न केवल निंदनीय बल्कि आपराधिक भी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था गरीबों, दलितों और पीड़ितों के लिए न केवल असंवेदनशील है, बल्कि अमानवीय भी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में जांच दल जाने के उपरांत प्रशासन सक्रिय हुआ। बीडीओ दौड़ते हुए पहुंचे और पीड़िता की मां को 4 लाख रुपये का चेक सौंपा। साथ ही उन्हें आजीवन 7750 रुपए मासिक पेंशन, इंदिरा आवास और बच्चों को आंबेडकर स्कूल में पढ़ाने का आश्वासन दिया गया। यद्यपि आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन प्रशासन की संवेदनहीनता स्पष्ट रूप से उजागर हुई है। सामान्यतः ऐसे मामलों में मजिस्ट्रेट की नियुक्ति होती है, किंतु पीएमसीएच तक प्रशासन का कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। मुजफ्फरपुर से रेफर करने में देरी हुई और पीएमसीएच में भी घंटों इलाज शुरू नहीं हो सका, जो प्रशासनिक लापरवाही की पराकाष्ठा है। पीड़िता अत्यंत गरीब व भूमिहीन परिवार से संबंधित थी। पिता का निधन दो वर्ष पूर्व हो चुका है और मां मजदूरी कर बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं। मृतका के दो छोटे भाई भी हैं। स्थानीय भाजपा विधायक की पूर्ण निष्क्रियता पर भी गहरा रोष व्यक्त किया। इस घटना के बाद गांव की बच्चियां स्कूल जाने से डर रही हैं। उन्हें भय है कि कहीं उनके साथ भी ऐसी कोई अमानवीय घटना न हो जाए। यह तथाकथित सुशासन पर करारा तमाचा है। हम सभी लोकतांत्रिक संगठनों, नागरिक समाज और आम नागरिकों से इस जन आंदोलन में व्यापक भागीदारी की अपील की है। यदि सरकार ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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