रालोसपा का जदयू में विलय, लव-कुश राजनीति एकजुट होकर यादव राजनीति को जवाब देगी !

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http://codian.mx/27279-site-de-rencontre-gay*-71851/ वर्ष 2013 में उपेन्द्र कुशवाहा ने अरुण कुमार के साथ मिलकर नई पार्टी रालोसपा बनाई थी। गांधी मैदान में पार्टी का बड़ा आयोजन हुआ था जिसमें छात्रों नौजवानों के साथ-साथ किसानों की लडाई लड़ने का संकल्प लिया गया था। रालोसपा के कर्यक्रमों में एक नारा खूब गूंजा करता था- बिहार का मुख्यमंत्री कैसा हो, उपेन्द्र कुशवाह जैसा हो। उपेन्द्र कुशवाह ने बहुत जतन से बनाई अपनी उस राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) का विलय जदयू में कर दिया। उऩ्होंने डेढ़ सौ नेताओं के साथ जदयू की सदस्यता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने ले ली। उन्हें इस विलय के पुरस्कार स्वरूप नीतीश कुमार ने तत्काल पार्लियामेंट्री बोर्ड क चेयरमैन बनाने की घोषणा कर दी। नौ साल बाद वे जदयू में लौटे। अपनी पार्टी का विलय करते हुए उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि मैंने बहुत उतार- चढ़ाव देखा है। जनता के आदेश पर नीतीश कुमार के साथ आया हूं। जब तक जीवन है, तब  तक नीतीश कुमार के साथ काम करुंगा। बिना शर्त के साथ आया हूं, जो तय करेंगे वो मान्य होग। तेजस्वी यादव पर व्यंग्य करते हुए कहा कि कुछ लोग मंसूबा पाल रहे हैं कि उन्हें एक बार फिर मौका मिलना चाहिए बिहार को आतंक और पाखंड में झोंकने का। बिहार के खजाना को खाली करना चाहते हैं। लेकिन उपेन्द्र कुशवाह के रहते ऐसा नहीं हो सकता है। उन्होंने नीतीश कुमार को बड़ा भाई बताते हुए कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान और बराबरी पर लाने के लिए जेडीयू में पार्टी का विलय कर रह हूं।

netflix gay dizisi Mednogorsk मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फूलों के गुलदस्ते के साथ रालोसपा के विलय का स्वागत किया। नीतीश कुमार ने कहा कि काफी दिनों से बातचीत चल रही थी, उपेन्द्र कुशवाह की पार्टी हमारे साथ आ गई है। इससे काफी खुशी हो रही है। हमलोग मिलकर राज्य और देश की सेवा करेंगे।

gay hook up in anacortes washington Avenal इस बार के विधान सभा चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू की सीटें काफी कम हो गईं। इसलिए नीतीश कुमार कई तरह के पार्टी को मजबूत बनने के अभियान पर हैं। उसी अभियान का एक बड़ा हिस्सा रालोसपा का विलय भी है। इससे कोयरी- कुर्मी जाति की एकजुटता बढ़ेगी। माना जाता ह कि बिहार में कुर्मी 2-3 फ़ीसदी हैं, जबकि कोयरी 10-11फ़ीसदी है। इस तरह दोनों वोटबैंक 14-15 फीसदी के आसपास आता है। यादवों का वोट बैंक बिहार में 16 फीसदी है। उपेन्द्र कुशवाहा केन्द्र में मंत्री रह चुके हैं और उनकी महत्वाकांक्षा बिहार का मुख्यमंत्री बनने की रही हैै।

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